
एशिया-प्रशांत क्षेत्र में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के हालिया संयुक्त सैन्य अभ्यास ने उत्तर कोरिया को सतर्क कर दिया है। परमाणु हथियारों से लैस B-52 बॉम्बर की मौजूदगी और रूसी मंत्री की उत्तर कोरिया यात्रा ने हालात और संवेदनशील बना दिए हैं।
तीन देशों की संयुक्त सैन्य ताकत का प्रदर्शन
दक्षिण कोरिया के जेजू द्वीप के पास अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में संयुक्त हवाई अभ्यास किया गया, जिसमें अमेरिका का परमाणु-सक्षम B-52H बॉम्बर भी शामिल था। इस अभ्यास का उद्देश्य उत्तर कोरिया की मिसाइल और परमाणु क्षमताओं के खिलाफ सुरक्षा तैयारियों को मजबूती देना है।
उत्तर कोरिया को रूस और चीन का समर्थन
उत्तर कोरिया ने बीते कुछ समय में रूस से अपने संबंध मजबूत किए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह रूस को गोला-बारूद और सैन्य सहायता दे रहा है, जिसके बदले तकनीकी और आर्थिक मदद मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को नई रफ्तार दे सकती है।
अमेरिका और सहयोगियों की चिंता
तीनों देशों – अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया – के सैन्य प्रमुखों ने उत्तर कोरिया की गतिविधियों पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि उत्तर कोरिया रूस के समर्थन से क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा बनता जा रहा है। उन्होंने संयुक्त सैन्य सहयोग बढ़ाने और खतरे का मुकाबला करने के लिए साझा रणनीति पर काम करने की बात कही है।
क्या तीसरे विश्व युद्ध की आशंका है?
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि दुनिया दो धड़ों में बंटती जा रही है:
एक तरफ: अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया
दूसरी तरफ: उत्तर कोरिया, रूस, चीन और ईरान
अगर किसी उकसावे या सैन्य झड़प की स्थिति बनी, तो यह संघर्ष सीमा पार जाकर वैश्विक रूप ले सकता है। यह संभावना अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है।