
मंगलवार को सूर्य से एक बेहद शक्तिशाली सौर ज्वाला (Solar Flare) निकली है, जिसे वैज्ञानिकों ने X1.2 श्रेणी की फ्लेयर के रूप में दर्ज किया है। नासा और अंतरिक्ष मौसम विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इसका असर धरती पर रेडियो संचार, बिजली व्यवस्था और सैटेलाइट तकनीक पर पड़ सकता है।
क्या है X1.2 सौर ज्वाला?
इस फ्लेयर को ‘एक्स-क्लास’ की श्रेणी में रखा गया है — ये सबसे ज्यादा ताकतवर श्रेणी होती है। इसमें “X” स्तर को दर्शाता है और “1.2” इसकी तीव्रता को। यह फ्लेयर मंगलवार शाम को सूर्य के उस हिस्से से फूटा जो पृथ्वी की दिशा में था।
किस क्षेत्र पर सबसे ज्यादा असर?
अंतरिक्ष मौसम विशेषज्ञ डॉ. तामिथा स्कोव के अनुसार, इसका सबसे ज्यादा असर पश्चिमी गोलार्ध पर हुआ है। इसमें अमेरिका का पश्चिमी हिस्सा, अलास्का, न्यूजीलैंड, रूस का पूर्वी क्षेत्र और एशिया-प्रशांत देश शामिल हो सकते हैं।
हवाई जैसे इलाकों में हैम रेडियो ऑपरेटरों ने अचानक रेडियो सिग्नल्स के गायब होने की शिकायत की। वैज्ञानिकों ने पुष्टि की है कि प्रशांत महासागर के ऊपर रेडियो ब्लैकआउट की स्थिति बन गई थी।
संभावित खतरे क्या हैं?
-
बिजली ग्रिड में बाधाएं
सौर तूफान के कारण पृथ्वी की मैग्नेटिक फील्ड में उतार-चढ़ाव आ सकता है जिससे बिजली सप्लाई में रुकावटें आ सकती हैं। -
सैटेलाइट और GPS पर असर
सैटेलाइट कम्युनिकेशन और जीपीएस आधारित सेवाओं में गड़बड़ी हो सकती है, खासकर जब यह फ्लेयर धरती के ऊपरी वायुमंडल को प्रभावित करता है। -
ऑरोरा (Northern Lights) की संभावना
कुछ क्षेत्रों में — खासकर ऊंचे अक्षांशों में — रंगीन रोशनी या “ऑरोरा” दिखने की संभावना भी बनी हुई है।
आगे क्या?
स्पेसवेदर डॉट कॉम और नासा ने जानकारी दी है कि सूर्य पर मौजूद सनस्पॉट 4114 अभी भी सक्रिय है। इसमें “डेल्टा मैग्नेटिक फिल्ड” पाया गया है जो भविष्य में और भी सौर ज्वालाओं का संकेत हो सकता है। साथ ही, वैज्ञानिकों ने बताया कि इसके साथ निकला कोरोनल मास इजेक्शन (CME) नामक प्लाज्मा बादल भी 15 से 72 घंटे में पृथ्वी तक पहुंच सकता है।
क्या करें?
इस तरह की घटनाओं से आम लोग घबराएं नहीं। वैज्ञानिकों की टीमें इस पर लगातार नजर रख रही हैं। लेकिन अगर आप रेडियो, नेविगेशन या सैटेलाइट आधारित सेवाओं पर निर्भर हैं, तो थोड़ी अस्थायी रुकावट के लिए तैयार रहें।