
आज के समय में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर दो ऐसी आम स्वास्थ्य समस्याएं हैं, जो अकेले ही गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती हैं। लेकिन अगर ये दोनों साथ हो जाएं, तो हृदय रोग, स्ट्रोक और किडनी से जुड़ी समस्याओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। अच्छी बात ये है कि कुछ आसान और नियमित आदतों के ज़रिए इन्हें काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। जानिए ऐसी 5 ज़रूरी आदतें, जो आपके ब्लड शुगर और बीपी दोनों को कंट्रोल में रखने में मदद कर सकती हैं।
1. संतुलित भोजन लें
ब्लड शुगर और बीपी कंट्रोल करने के लिए सबसे जरूरी है हेल्दी डाइट। अपने आहार में कम नमक और कम चीनी का सेवन करें। ताजे फल (जैसे सेब, जामुन, नाशपाती), हरी पत्तेदार सब्जियां, साबुत अनाज और दालें शामिल करें। जंक फूड, पैकेज्ड स्नैक्स और शुगर युक्त पेय से दूरी बनाएं। कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फूड्स शुगर को कंट्रोल करते हैं और कम सोडियम बीपी को संतुलित रखने में मदद करता है।
2. नियमित व्यायाम करें
हर दिन 30 से 40 मिनट तक चलना, योग करना या साइकिलिंग जैसी मध्यम स्तर की एक्सरसाइज करें। यह न केवल ब्लड शुगर को संतुलित रखता है, बल्कि ब्लड प्रेशर को भी सामान्य करता है। एक्सरसाइज से इंसुलिन का प्रभाव बेहतर होता है और दिल की सेहत सुधरती है। अगर आप किसी दवा पर हैं, तो नई एक्सरसाइज शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
3. तनाव से निपटें
तनाव दोनों ही स्थितियों को बिगाड़ सकता है। तनाव कम करने के लिए मेडिटेशन, डीप ब्रीदिंग या योग जैसे उपाय अपनाएं। रोजाना कम से कम 10 मिनट माइंडफुलनेस प्रैक्टिस करें। इसके अलावा, रात में 7 से 8 घंटे की नींद जरूर लें, क्योंकि नींद की कमी से भी शुगर और बीपी का स्तर बिगड़ सकता है।
4. वजन पर रखें नियंत्रण
अधिक वजन या मोटापा हाई बीपी और शुगर के मुख्य कारणों में से एक है। हेल्दी वजन बनाए रखने के लिए अपने खानपान में संतुलन लाएं और नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि करें। खासकर पेट के आसपास की चर्बी को घटाने की कोशिश करें, क्योंकि यही हिस्सा इंसुलिन रेसिस्टेंस और हाई बीपी का बड़ा कारण बनता है। छोटी-छोटी आदतें जैसे छोटे बर्तन में खाना या धीरे-धीरे खाने से भी मदद मिलती है।
5. समय-समय पर जांच कराएं
शुगर और बीपी को ट्रैक पर रखने के लिए समय-समय पर इनकी जांच करवाना जरूरी है। डॉक्टर के निर्देशों के अनुसार दवाएं लें और नियमित रूप से दिल, किडनी और लिवर की जांच भी कराएं। इससे किसी भी गंभीर स्थिति को शुरुआती स्तर पर ही पकड़कर इलाज किया जा सकता है।
नोट: यह लेख केवल जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी आम सुझावों और हेल्थ गाइडलाइंस पर आधारित है। किसी भी नई आदत को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या हेल्थ एक्सपर्ट से परामर्श जरूर लें।