
गुजरात के अहमदाबाद में हाल ही में हुए भीषण विमान हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। इस हादसे में 241 लोगों की जान चली गई, और सिर्फ एक व्यक्ति ही बच पाया। मृतकों में एक नाम ऐसा भी था, जिसने संघर्षों से लड़कर अपना सपना पूरा किया था — मैथिली पाटिल, जो एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 की क्रू मेंबर थीं।
🌾 एक छोटे से गांव से आसमान तक का सफर
मैथिली महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले की पनवेल तालुका के न्हावा गांव से थीं। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य थी, लेकिन उनकी मेहनत और दृढ़ निश्चय ने उन्हें वो मुकाम दिलाया, जिसका सपना उन्होंने बचपन से देखा था — एयर होस्टेस बनने का।
उन्होंने गांव के टी.एस. रहमान स्कूल से 12वीं तक पढ़ाई की, और इसके बाद प्रशिक्षण लेकर एयर इंडिया में चयनित हुईं। ये सब कुछ आसान नहीं था, लेकिन मैथिली ने कभी हार नहीं मानी।
👨👩👧 परिवार और समाज की उम्मीद
मैथिली के परिवार में माता-पिता, दो बहनें और एक भाई है। वह सबसे बड़ी संतान थीं और परिवार की उम्मीद भी। उनके पिता ओएनजीसी में श्रमिक के रूप में कार्यरत हैं। मैथिली ने अपनी नौकरी और मेहनत से न सिर्फ अपने घर की स्थिति सुधारी, बल्कि गांव की लड़कियों के लिए एक मिसाल भी बनीं।
📅 हादसे से पहले की आखिरी ड्यूटी
11 जून को मैथिली ड्यूटी के लिए मुंबई से अहमदाबाद पहुंची थीं। अगले दिन, यानी 12 जून को उनकी ड्यूटी एयर इंडिया की लंदन जाने वाली फ्लाइट में थी। लेकिन उड़ान के कुछ ही समय बाद विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
विमान एक हॉस्टल भवन पर गिरा, और हादसे के बाद घटनास्थल पर भारी धुआं और तबाही का मंजर था। अस्पताल कर्मचारियों के अनुसार, यह मंजर 2001 के भूकंप जैसा भयावह था।
🕊️ स्कूल और गांव में शोक
मैथिली के स्कूल की प्रिंसिपल डेज़ी पॉल ने उन्हें याद करते हुए कहा कि वह एक अनुशासित, शांत और मेधावी छात्रा थीं। कुछ महीने पहले आयोजित एक पूर्व छात्र कार्यक्रम में मैथिली ने स्कूल का दौरा किया था और छात्रों को अपने अनुभव साझा कर प्रेरित किया था।
गांव के पूर्व सरपंच और उनके रिश्तेदार जीतेन्द्र म्हात्रे ने बताया कि मैथिली ने सीमित संसाधनों में रहकर असाधारण सफलता पाई थी। हादसे की खबर ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया है।
🤝 टाटा समूह का मानवीय समर्थन
टाटा समूह और एयर इंडिया ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने घोषणा की है कि दुर्घटना में जान गंवाने वालों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। साथ ही, घायल लोगों के इलाज और प्रभावित हॉस्टल भवन के पुनर्निर्माण की जिम्मेदारी भी टाटा समूह ने ली है।
🔚 एक प्रेरणादायक सफर, जो अधूरा रह गया
मैथिली पाटिल की कहानी महज़ एक दुखद समाचार नहीं है, बल्कि यह हमें यह याद दिलाती है कि संघर्ष और आत्मविश्वास से कोई भी सपना सच हो सकता है। वह उन हजारों लड़कियों के लिए प्रेरणा थीं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद ऊँचा उड़ने का हौसला रखती हैं। उनका जाना सिर्फ उनके परिवार के लिए नहीं, पूरे समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है।