
भीड़ प्रबंधन भारत में लंबे समय से एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। ताजा उदाहरण पुरी रथयात्रा का है, जहां भगदड़ की वजह से तीन लोगों की मौत हो गई और दर्जनों घायल हो गए। इससे पहले प्रयागराज महाकुंभ और बेंगलुरु में भी ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। अब सवाल ये उठता है कि बार-बार एक जैसी घटनाओं के बाद भी हम कहां गलती कर रहे हैं?
पुरी रथयात्रा में कैसे मची भगदड़?
ओडिशा के पुरी शहर में रथयात्रा के दौरान भगदड़ मचने से 3 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, रविवार सुबह श्री गुंडिचा मंदिर के पास भीड़भाड़ के बीच अनुष्ठान सामग्री लेकर दो ट्रक प्रवेश कर गए, जिससे अफरा-तफरी मच गई। लोग इधर-उधर भागने लगे, इसी दौरान कई लोग दब गए और जान चली गई।
इस हादसे में करीब 50 से अधिक लोग घायल भी हुए हैं। मरने वालों में एक बुजुर्ग, एक महिला और एक अधेड़ उम्र की महिला शामिल हैं।
मुख्यमंत्री का त्वरित एक्शन
घटना के बाद मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने फौरन जिलाधिकारी और एसपी का स्थानांतरण कर दिया। यह कदम दर्शाता है कि प्रशासनिक स्तर पर चूक को नकारा नहीं जा सकता।
बेंगलुरु में भी ऐसी ही स्थिति
4 जून 2025 को बेंगलुरु में आईपीएल टीम RCB के जीत के जश्न के दौरान भारी भीड़ उमड़ पड़ी। चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर हजारों फैंस जमा हो गए, जिससे कंट्रोल से बाहर हुई भीड़ ने भगदड़ का रूप ले लिया।
इसमें 11 लोगों की मौत हुई और 50 से ज्यादा घायल हुए।
प्रयागराज महाकुंभ की त्रासदी
जनवरी 2025 में प्रयागराज में कुंभ मेले के दौरान भीड़ के दबाव से बैरिकेडिंग टूट गई और भगदड़ मच गई।
करीब 30 लोगों की मौत हुई और 90 से ज्यादा श्रद्धालु घायल हो गए। यह हादसा मौनी अमावस्या की पूर्व संध्या पर हुआ जब श्रद्धालु ब्रह्म मुहूर्त में स्नान के लिए एकत्र थे।
बार-बार हो रही चूक, क्यों?
इन सभी आयोजनों में एक बात समान थी—भीड़ पहले से अनुमानित थी। प्रशासन को पता था कि लाखों लोग शामिल होंगे, फिर भी हादसे हुए। इसका मतलब है कि या तो योजना में कमी रही या क्रियान्वयन में।
इतनी बड़ी घटनाओं के बावजूद हर बार चूक होना दर्शाता है कि हमारी भीड़ प्रबंधन प्रणाली में सुधार की सख्त जरूरत है।
सिर्फ प्रशासन नहीं, आम लोग भी जिम्मेदार
प्रशासन की जिम्मेदारी जितनी है, उतनी ही लोगों की भी है।
लोगों को भीड़ में धैर्य और अनुशासन बरतने की समझ होनी चाहिए।
अक्सर लोग खुद भी नियम तोड़कर खतरे को बढ़ा देते हैं।
क्या हो सकते हैं समाधान?
पूर्व योजना और प्रशिक्षण – आयोजनों से पहले पुलिस और स्वयंसेवकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाए।
तकनीकी सहायता – ड्रोन, कैमरे और सेंसर की मदद से भीड़ की निगरानी हो।
लोगों की जागरूकता – जनता को सुरक्षित आचरण के लिए शिक्षित करना होगा।
भीड़ का बंटवारा – प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग मार्ग हों और बुजुर्गों-बच्चों के लिए विशेष व्यवस्था हो।
रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम – जिससे भीड़ की स्थिति का तुरंत विश्लेषण किया जा सके।