जब बेटी ने संभाली ड्यूटी, जहां पिता ने छोड़ी थी – भारतीय सेना में सेवा और समर्पण की मिसाल

भारतीय सेनाओं में देश सेवा की परंपरा सिर्फ एक पीढ़ी तक सीमित नहीं रहती — यह एक परिवार की धड़कनों में बस जाती है। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है एन रोज़ की, जिन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) से ट्रेनिंग पूरी कर एक नई मिसाल कायम की, और उस मुकाम पर पहुंचीं जहां कभी उनके पिता कमांडर एम.पी. मैथ्यू अपनी सेवा पूरी करके लौटे थे।


👨‍✈️ पिता से मिली प्रेरणा, बेटी ने निभाई जिम्मेदारी

कोच्चि स्थित नेवी चिल्ड्रन स्कूल से पढ़ाई करने वाली एन रोज़ ने बचपन से ही अपने पिता की ड्यूटी, अनुशासन और देशभक्ति को करीब से देखा था। उन्होंने यह ठान लिया था कि वे भी एक दिन वर्दी पहनेंगी और देश की सेवा करेंगी।

जब 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के लिए NDA के द्वार खोले, तब एन रोज़ ने इसे अपने सपनों की राह बना लिया। कठिन तैयारी और समर्पण के साथ उन्होंने NDA की परीक्षा पास की और 2022 में एडमिशन लिया।


🏋️‍♀️ NDA की सख्त ट्रेनिंग बनी ताकत की कसौटी

एन रोज़ का NDA में तीन वर्षों का सफर आसान नहीं था। रोजाना की शारीरिक ट्रेनिंग, रणनीति सीखना, अनुशासन के सख्त नियम – इन सबने उन्हें मानसिक, शारीरिक और नेतृत्व क्षमता में मजबूत बना दिया।

📅 30 मई 2025 को उन्होंने गर्व से NDA से पास आउट किया — वह भी उन चुनिंदा पहली महिला कैडेट्स में से एक बनकर, जिन्होंने इस प्रतिष्ठित संस्थान में इतिहास रचा।


👩‍🎓 परिवार से सेना तक – सेवा का सिलसिला जारी

कमांडर मैथ्यू ने जहां अपनी नौसेना की ड्यूटी पूरी की थी, ठीक उसी राह पर उनकी बेटी ने कदम बढ़ाए। यह केवल एक करियर नहीं, बल्कि सेवा, त्याग और गर्व की ऐसी कहानी है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती है।

एन रोज़ की इस उपलब्धि से यह संदेश जाता है कि जब इरादे मजबूत हों और रास्ता देशभक्ति से जुड़ा हो, तब कोई भी मंजिल दूर नहीं।


🇮🇳 निष्कर्ष

एन रोज़ की यह यात्रा सिर्फ NDA में शामिल होने की नहीं है — यह एक बेटी के संघर्ष, सपने, और संकल्प की कहानी है। जिस जगह से पिता ने अपनी ड्यूटी खत्म की, वहीं से बेटी ने देश सेवा की कमान थामी — और यह साबित कर दिया कि राष्ट्रभक्ति विरासत बनकर भी जिंदा रहती है

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