
प्रशांत किशोर किशनगंज जनसभा
बिहार में जन सुराज यात्रा के तहत किशनगंज पहुंचे प्रशांत किशोर ने बुधवार को बहादुरगंज में आयोजित जनसभा में केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ चुनाव आयोग पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने इसे भारतीय लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताते हुए कहा कि चुनाव आयोग का विशेष मतदाता पुनरीक्षण अभियान (SIR) दरअसल एक “राजनीतिक साजिश” है जो विशेष समुदाय को निशाना बनाने के मकसद से चलाया जा रहा है।
प्रशांत किशोर किशनगंज जनसभा में बोले – वोटर लिस्ट से नाम काटना BJP की चाल
प्रशांत किशोर ने प्रेस से बातचीत में कहा, “यह SIR अभियान कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं है। यह बीजेपी की एक सोची-समझी रणनीति है, जिसके जरिए अल्पसंख्यक समुदाय खासकर मुसलमानों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को यह अधिकार नहीं है कि वह किसी नागरिक की नागरिकता तय करे। यदि किसी का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है, तो वह जन सुराज से संपर्क कर सकता है।
“हम आपकी लड़ाई लड़ेंगे। यह संविधान और वोट के अधिकार की लड़ाई है,” – प्रशांत किशोर
मुसलमानों को दी नबी की हदीस की याद
प्रशांत किशोर किशनगंज जनसभा में मुसलमानों से सीधा संवाद करते हुए बोले – “जिस कौम को अपने रहनुमाओं की पहचान न हो, अल्लाह उस पर जालिम हुक्मरानों को मुसल्लत कर देता है।” उन्होंने आगे कहा कि यह सिर्फ हमारी नहीं, बल्कि पैगंबर साहब की हदीस है।
उन्होंने मुस्लिम समुदाय से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों की शिक्षा, रोजगार और भविष्य को लेकर जागरूक बनें। किशनगंज जैसे सीमांचल इलाके में युवाओं को केवल सियासी मोहरा बना दिया गया है।
EC पर फिर हमला – ‘नेपाल-बांग्लादेश के वोटर कहां से आए?’
प्रशांत किशोर ने सवाल उठाया कि यदि मौजूदा वोटर लिस्ट गलत है, तो फिर इसी सूची के आधार पर मोदी प्रधानमंत्री कैसे बन गए? उन्होंने पूछा:
“यह बताइए कि बीजेपी और नीतीश कुमार की सरकार में ही नेपाल और बांग्लादेश के नागरिकों का नाम वोटर लिस्ट में कैसे जुड़ गया?”
उन्होंने यह भी कहा कि यदि ये नाम गलत तरीके से जुड़ गए हैं, तो इसके लिए सरकार जिम्मेदार है, न कि आम नागरिक।
RJD पर भी साधा निशाना – ‘मुसलमान उनके लालटेन का किरासन तेल हैं’
प्रशांत किशोर किशनगंज जनसभा में केवल केंद्र पर नहीं, बल्कि राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) पर भी करारा प्रहार किया।
उन्होंने कहा कि लालू-राबड़ी ने बिहार पर 15 साल राज किया और तेजस्वी यादव ने डिप्टी सीएम के तौर पर 3 साल। इतने वर्षों में सीमांचल के मुस्लिम युवाओं की शिक्षा और रोजगार को लेकर क्या किया गया?
“मुसलमान इनके लालटेन का किरासन तेल बनकर जलते रहे हैं। रौशनी लालू-तेजस्वी के घर में होती है, और अंधेरा सीमांचल के घरों में छाया रहता है।”
प्रशांत किशोर ने युवाओं के संघर्ष को उजागर करते हुए कहा कि यहां के बच्चे रोज़गार के लिए दिल्ली, पंजाब या बंगलुरु जाते हैं, वो भी 10-12 हजार की मामूली नौकरी के लिए। दूसरी ओर, नेता उनके वोट से अपना भविष्य चमकाते हैं।
प्रशांत किशोर का खुला आमंत्रण – जन सुराज से जुड़िए
प्रशांत किशोर ने लोगों से अपील की कि वे जन सुराज आंदोलन का हिस्सा बनें। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी जाति, धर्म या पार्टी का नहीं, बल्कि न्याय और हक की लड़ाई है।
उन्होंने यह भी साफ किया कि वे किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उन राजनेताओं के खिलाफ हैं जो धर्म और जाति के नाम पर लोगों को ठगते आए हैं।
निष्कर्ष: क्या सीमांचल की सियासत बदलेगी?
प्रशांत किशोर किशनगंज जनसभा में जो बातें रखी गईं, वे स्पष्ट संकेत देती हैं कि सीमांचल की राजनीति अब सवालों के घेरे में है। चाहे वह केंद्र की नीतियां हों या क्षेत्रीय दलों की वोटबैंक पॉलिटिक्स, जन सुराज इन दोनों के बीच एक नया विकल्प बनने की कोशिश कर रहा है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सीमांचल के मुसलमान और युवा इस विचारधारा को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या यह आंदोलन वाकई कुछ बदलाव ला पाएगा।