बिहार चुनाव में महागठबंधन के साथ आ सकते हैं ओवैसी? AIMIM प्रमुख ने खोला पत्ता, बोले- ‘हम नहीं चाहते BJP जीते’

बिहार की सियासत में हलचल तेज होती जा रही है और इस बार चर्चा में हैं AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी। हैदराबाद से सांसद और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओवैसी ने हाल ही में संकेत दिए हैं कि उनकी पार्टी आगामी बिहार विधानसभा चुनावों में महागठबंधन (INDIA Bloc) के साथ चुनाव लड़ सकती है।

ओवैसी ने न सिर्फ यह कहा कि भाजपा-एनडीए को रोकना जरूरी है, बल्कि यह भी साफ कर दिया कि उनके बिहार प्रदेश अध्यक्ष इस दिशा में बातचीत की कोशिशें कर रहे हैं।


🔴 “हम नहीं चाहते कि BJP-एनडीए चुनाव जीते”: ओवैसी का बड़ा बयान

एएनआई से बातचीत में ओवैसी ने कहा,

“हम नहीं चाहते कि बिहार में बीजेपी-एनडीए चुनाव जीते। हमने सीमांचल क्षेत्र से आगे भी चुनाव लड़ने का फैसला किया है। दो विधानसभा क्षेत्रों में हमने अपने उम्मीदवार पहले ही घोषित कर दिए हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि AIMIM बिहार में पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ेगी, लेकिन अगर विपक्ष एकजुट होता है, तो वे भी बीजेपी को हराने के लिए साथ आ सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह फैसला महागठबंधन की तरफ से आना चाहिए।

“ये उनका फैसला होगा। हम ज़बरदस्ती किसी के साथ नहीं जुड़ना चाहते।”


🤝 AIMIM-महागठबंधन की संभावित नज़दीकी

जब ओवैसी से पूछा गया कि क्या वे महागठबंधन (INDIA Bloc) में शामिल होंगे, तो उन्होंने खुलासा किया कि बिहार के AIMIM अध्यक्ष अख्तरुल ईमान लगातार कोशिश कर रहे हैं। ओवैसी ने याद दिलाया कि उन्होंने 5 साल पहले भी महागठबंधन के नेताओं से संसद में बातचीत की थी, लेकिन तब बात आगे नहीं बढ़ पाई।

“लोगों को पता नहीं है कि मैंने 5 साल पहले इनके दो सांसदों से संसद में इस विषय पर बात की थी। आज भी अख्तरुल ईमान प्रयास कर रहे हैं कि कोई साझा रास्ता निकले ताकि बीजेपी को सत्ता से दूर रखा जा सके।”

इस बयान से साफ है कि AIMIM भाजपा को हराने के लिए महागठबंधन के साथ आने को तैयार है, लेकिन गेंद अब INDIA ब्लॉक के पाले में है।


🗳️ वोटर लिस्ट विवाद पर ओवैसी का चुनाव आयोग पर हमला

असदुद्दीन ओवैसी ने बिहार में वोटर लिस्ट की दोबारा जांच (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर भी चुनाव आयोग (ECI) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस जांच को “कानूनी रूप से संदिग्ध” करार दिया और कहा कि यह प्रक्रिया कई वास्तविक मतदाताओं को वोट देने से वंचित कर सकती है।

ओवैसी ने ECI को एक औपचारिक पत्र लिखकर यह आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि,

“चुनाव आयोग पिछले दरवाजे से बिहार में एनआरसी लागू कर रहा है। यह संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ है।”


📄 क्या आधार और जन्म प्रमाण पत्र ज़रूरी हो गया है?

ओवैसी ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि अब मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए नागरिकों को यह साबित करना होगा कि वे भारत में जन्मे हैं, और साथ ही अपने माता-पिता के जन्म की भी जानकारी देनी होगी। यह व्यवस्था बहुत सारे नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।

उन्होंने कहा,

“भारत में अब भी बर्थ रजिस्ट्रेशन की दर महज 75% है। अधिकतर सरकारी दस्तावेजों में त्रुटियां होती हैं। ऐसे में लाखों लोगों के लिए अपने भारतीय नागरिक होने का प्रमाण देना बहुत मुश्किल होगा।”


🌐 सीमांचल से बाहर भी AIMIM का विस्तार

अब तक AIMIM की बिहार में राजनीतिक उपस्थिति सीमांचल क्षेत्र तक सीमित रही है, लेकिन इस बार पार्टी ने संकेत दिया है कि वह सीमांचल के बाहर भी चुनाव मैदान में उतरेगी। ओवैसी ने बताया कि दो सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा हो चुकी है और बाकी पर भी तैयारी चल रही है।

AIMIM की सीमांचल में अच्छी पकड़ रही है। 2020 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 5 सीटें जीती थीं, लेकिन बाद में चार विधायक पार्टी छोड़कर राजद में शामिल हो गए थे। अब पार्टी फिर से संगठन को मजबूत कर रही है।


🧾 क्या यह चुनाव AIMIM के लिए निर्णायक होगा?

ओवैसी की पार्टी पर अक्सर यह आरोप लगता है कि वह बीजेपी की ‘बी-टीम’ की तरह काम करती है। इस सवाल पर AIMIM बार-बार यह स्पष्ट करती आई है कि वे संवैधानिक राजनीति में विश्वास रखते हैं, और उनका मकसद है अल्पसंख्यकों, दलितों और पिछड़ों की आवाज़ को मजबूत करना।

इस बार अगर AIMIM महागठबंधन के साथ चुनाव लड़ती है, तो यह उनके राजनीतिक रणनीति में बड़ा बदलाव माना जाएगा। इससे एक तरफ मुस्लिम वोटों का बंटवारा रुक सकता है, वहीं बीजेपी के खिलाफ एक मज़बूत मोर्चा भी तैयार हो सकता है।


🧭 क्या INDIA ब्लॉक अपनाएगा AIMIM को?

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या महागठबंधन यानी INDIA Bloc ओवैसी की पार्टी को अपने साथ शामिल करेगा? AIMIM के प्रति महागठबंधन के कई नेताओं का रुख अब तक नरम नहीं रहा है। लेकिन अगर भाजपा को सत्ता से रोकना लक्ष्य है, तो सभी विपक्षी दलों को एक मंच पर आना ही होगा — यही ओवैसी का संदेश है।

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