
भारत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ गई है — भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अब पहले भारतीय बन गए हैं जो किसी निजी स्पेस मिशन के जरिए अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) तक पहुंचे हैं।
उनकी यह यात्रा Axiom-4 (Ax-4) मिशन का हिस्सा है, जिसे स्पेसएक्स की मदद से सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। यह एक ऐसा मिशन है जो भारत को वैश्विक अंतरिक्ष मंच पर एक नई ऊंचाई पर ले जाता है।
🚀 मिशन की शुरुआत: लॉन्च कब और कैसे हुआ?
शुभांशु शुक्ला ने फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से भारतीय समयानुसार बुधवार रात 12:31 बजे उड़ान भरी। यह उड़ान स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट के ज़रिए की गई, जिसमें ड्रैगन कैप्सूल सवार था।
इस मिशन में कुल चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं:
पेगी व्हिटसन (मिशन कमांडर, अमेरिका)
शुभांशु शुक्ला (पायलट, भारत)
सावोज उजनास्की-विश्निवेस्की (पोलैंड)
तिबोर कपु (हंगरी)
🔬 मिशन का उद्देश्य: 60 से अधिक प्रयोग
Axiom-4 मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्री ISS में 14 दिन बिताएंगे, जहां वे 60 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे। इन प्रयोगों का मकसद माइक्रोग्रैविटी (अर्थात बहुत कम गुरुत्वाकर्षण) में जीवन, स्वास्थ्य, जैव-प्रौद्योगिकी और शरीर पर प्रभावों को समझना है।
📡 लाइव ट्रैकिंग: आप भी देख सकते हैं शुभांशु की हर हलचल
यदि आप इस ऐतिहासिक मिशन की लाइव जानकारी चाहते हैं, तो स्पेसएक्स की आधिकारिक वेबसाइट spacex.com/follow-dragon पर जाकर रीयल टाइम में देख सकते हैं:
यान की वर्तमान स्थिति
उसकी ऊंचाई और गति
स्टेशन से कितनी दूरी बाकी है
मिशन की कुल प्रगति (Progress Bar)
🔄 अगला पड़ाव: ISS से डॉक्सिंग
फिलहाल, शुभांशु और उनकी टीम पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगा रहे हैं।
भारतीय समयानुसार गुरुवार शाम 4:30 बजे यह ड्रैगन यान ISS से जुड़ने (Docking) की प्रक्रिया पूरी करेगा। इसके बाद सभी यात्री स्टेशन के अंदर जाकर अपने अनुसंधान कार्य शुरू करेंगे।
🇮🇳 भारत के लिए गौरवशाली क्षण
यह केवल शुभांशु शुक्ला की व्यक्तिगत सफलता नहीं है — यह पूरे भारत के लिए एक सांकेतिक मोड़ है। यह दिखाता है कि भारतीय विशेषज्ञ अब ISRO के पारंपरिक मिशनों से आगे निकलकर वैश्विक निजी अंतरिक्ष अभियानों में भी अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं।