
बुधवार को जब घरेलू शेयर बाजार में हल्की गिरावट का माहौल था, तब आईटी सेक्टर में तेजी ने सबका ध्यान खींचा। सेंसेक्स करीब 200 अंक नीचे था और निफ्टी भी लाल निशान पर कारोबार कर रहा था, लेकिन इन्फोसिस, विप्रो और टीसीएस जैसी आईटी कंपनियों के शेयरों में मजबूती देखने को मिली। सवाल उठता है कि जब बाकी सेक्टर नीचे हैं, तो आईटी सेक्टर क्यों चमक रहा है?
यूएस फेड की संभावित ब्याज दर कटौती एक बड़ी वजह
हाल में गोल्डमैन सैक्स ने एक पूर्वानुमान में कहा है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व सितंबर में ब्याज दरों में कटौती कर सकता है, जबकि पहले इसका अनुमान दिसंबर के लिए था। कारण ये है कि अमेरिका में महंगाई उतनी तेजी से नहीं बढ़ी जितनी पहले सोची गई थी।
इसी बीच, पुर्तगाल में हुए एक सम्मेलन में फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने भी यह संकेत दिया कि आर्थिक आंकड़ों की समीक्षा के बाद जुलाई में भी कटौती संभव हो सकती है। इससे निवेशकों में उम्मीद जगी है कि जल्दी ही फेड दरों में कमी करेगा।
आईटी सेक्टर क्यों हो रहा है फायदा?
भारत की बड़ी आईटी कंपनियाँ अमेरिकी बाजार पर काफी निर्भर हैं। वहां की कंपनियों को तकनीकी सेवाएँ देने से भारतीय आईटी फर्मों को बड़ी कमाई होती है। अगर अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती होती है, तो वहां की कंपनियों के पास ज्यादा कैश फ्लो होगा — यानी वे ज़्यादा खर्च करने में सक्षम होंगी।
इससे भारतीय आईटी फर्मों को ज़्यादा प्रोजेक्ट और डील मिलने की उम्मीद बढ़ जाती है। यही वजह है कि निवेशक इन कंपनियों के शेयरों में आशावाद के साथ निवेश कर रहे हैं।
क्या हो सकती है कटौती?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार यूएस फेड की तरफ से 75 से 100 बेसिस पॉइंट तक की कटौती संभव है। अगर ऐसा होता है, तो यह भारतीय आईटी सेक्टर के लिए बड़ी राहत और अवसर दोनों साबित हो सकता है।
निष्कर्ष
जबकि भारत का शेयर बाजार इस समय वैश्विक संकेतों और स्थानीय आर्थिक स्थितियों के चलते कुछ दबाव में है, आईटी सेक्टर की मजबूती एक सकारात्मक संकेत है। अमेरिकी आर्थिक नीतियों का सीधा असर भारत की तकनीकी कंपनियों पर पड़ता है, और आने वाले हफ्तों में यह ट्रेंड जारी रह सकता है।