
12 जून को गुजरात के अहमदाबाद से लंदन जा रहा एक यात्री विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे की गंभीरता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि विमान में सवार 242 लोगों में से केवल एक ब्रिटिश नागरिक ही जीवित बच पाया। शेष यात्रियों की दुखद मृत्यु हो गई। मृतकों में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री समेत कई नागरिक शामिल थे।
इस घटना के बाद सरकार ने विमान हादसे की जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो एक निर्धारित अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल के तहत की जाती है।
कौन करता है भारत में विमान हादसों की जांच?
भारत में इस तरह के हादसों की जांच की ज़िम्मेदारी एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की होती है। यह संस्था नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अंतर्गत आती है और इसका कार्य है विमान दुर्घटनाओं के कारणों का पता लगाना और भविष्य के लिए सुरक्षा उपाय सुझाना।
AAIB एक विशेषज्ञों की टीम बनाती है जो हादसे की जमीनी जांच करती है। ज़रूरत पड़ने पर हादसे में प्रभावित अन्य देशों की एजेंसियों या निर्माता कंपनियों को भी शामिल किया जाता है। उदाहरण के तौर पर, इस दुर्घटनाग्रस्त विमान का निर्माता बोइंग है और इसमें बड़ी संख्या में ब्रिटिश नागरिक सवार थे, इसलिए ब्रिटेन और अमेरिका की एजेंसियां भी जांच प्रक्रिया में सहयोग कर रही हैं।
जांच कैसे होती है?
हर विमान हादसे की जांच एक तयशुदा प्रक्रिया के अनुसार होती है:
हादसे की जगह को सील करना
ताकि सबूत सुरक्षित रहें और कोई छेड़छाड़ न हो सके।ब्लैक बॉक्स की बरामदगी
ब्लैक बॉक्स में पायलट और नियंत्रण कक्ष की बातचीत, उड़ान डेटा और अन्य तकनीकी रिकॉर्ड होते हैं, जो जांच के लिए बेहद ज़रूरी हैं।विमान के मलबे की जांच
तकनीकी खराबी, इंजन फेलियर या किसी बाहरी कारण का पता लगाने के लिए मलबे का अध्ययन किया जाता है।एटीसी रिकॉर्डिंग और रडार डेटा
पायलट और एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के बीच हुई बातचीत को खंगाला जाता है। साथ ही रडार से मिली जानकारी का विश्लेषण होता है।मौसम की स्थिति और CCTV फुटेज
हादसे के समय का मौसम कैसा था, यह देखा जाता है। एयरपोर्ट के आसपास के कैमरों से मिली फुटेज भी जांची जाती है।फॉरेंसिक जांच
पायलट और चालक दल के सदस्यों की मेडिकल जांच की जाती है, ताकि यह जाना जा सके कि कोई स्वास्थ्य समस्या या नशा तो वजह नहीं बना।प्रत्यक्षदर्शियों और स्टाफ से बातचीत
विमान से बचे यात्री, एयरपोर्ट स्टाफ, तकनीकी कर्मचारी और चश्मदीद लोगों से पूछताछ की जाती है।
कौन-कौन शामिल होते हैं जांच टीम में?
जांच में कई विशेषज्ञों को शामिल किया जाता है, जिनमें शामिल हो सकते हैं:
विमानन इंजीनियर
मेडिकल डॉक्टर
फॉरेंसिक विशेषज्ञ
मनोचिकित्सक
पायलट और टेक्निकल एक्सपर्ट्स
इन सभी का कार्य होता है हादसे के हर पहलू की गहराई से पड़ताल करना और यह तय करना कि दुर्घटना कैसे और क्यों हुई।
रिपोर्ट और निष्कर्ष
जांच पूरी होने के बाद AAIB एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करता है। यह रिपोर्ट AAIB की वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाती है और इसे अंतरराष्ट्रीय संस्था ICAO को भी भेजा जाता है।
रिपोर्ट में जो भी सुरक्षा संबंधी सुझाव होते हैं, उन्हें DGCA (भारत की विमानन नियामक संस्था) और अन्य देशों की विमानन एजेंसियों को भेजा जाता है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसे रोके जा सकें।
✍️ निष्कर्ष
विमान दुर्घटनाएं जितनी दुर्भाग्यपूर्ण होती हैं, उनकी जांच प्रक्रिया उतनी ही विस्तृत और तकनीकी होती है। इसका मकसद सिर्फ हादसे की वजह जानना नहीं, बल्कि आने वाले समय में हज़ारों यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी होता है।