
टेक्नोलॉजी की दुनिया की दिग्गज कंपनी Microsoft ने पाकिस्तान से अपनी उपस्थिति समेटने का निर्णय लिया है। 25 वर्षों की गतिविधियों के बाद यह फैसला सामने आया है, जो देश की तकनीकी और कारोबारी स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
🔹 Microsoft का पाकिस्तान में अब तक का सफर
Microsoft ने साल 2000 में पाकिस्तान में काम करना शुरू किया था। हालांकि देश में इसका कोई बड़ा कॉर्पोरेट ऑफिस नहीं रहा, लेकिन शिक्षा, सरकारी और उद्यम क्षेत्र में कंपनी की उपस्थिति खास रही है।
Microsoft ने Higher Education Commission (HEC) और Punjab Group of Colleges (PGC) जैसे संस्थानों के साथ मिलकर डिजिटल शिक्षा और ट्रेनिंग पर ज़ोर दिया।
देश के 200 से ज़्यादा उच्च शिक्षा संस्थानों को कंपनी ने तकनीकी समाधान और ऑनलाइन लर्निंग टूल्स मुहैया कराए।
Microsoft Teams और अन्य सॉफ्टवेयर टूल्स के ज़रिए छात्रों और प्रोफेशनल्स को स्किल डेवलपमेंट के अवसर दिए गए।
❓ क्यों बंद हो रहा है Microsoft का ऑपरेशन?
Microsoft पाकिस्तान के पूर्व कंट्री मैनेजर जवाद रहमान के अनुसार, यह निर्णय पूरी तरह बिजनेस-संबंधी है। उनके अनुसार, मौजूदा माहौल में विदेशी कंपनियों को पाकिस्तान में व्यापार करना मुश्किल लग रहा है।
राजनीतिक अस्थिरता
आर्थिक मंदी और गिरती मुद्रा
व्यापारिक नीतियों की जटिलता
कानून-व्यवस्था की कमजोर स्थिति
ये सभी कारक कंपनियों के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं।
🗣️ पूर्व राष्ट्रपति आरिफ अल्वी की चिंता
पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. आरिफ अल्वी ने Microsoft के इस कदम को चिंताजनक और चेतावनी देने वाला करार दिया। उनका मानना है कि अगर बड़े टेक ब्रांड्स पाकिस्तान छोड़ रहे हैं, तो यह देश के डिजिटल भविष्य और निवेश माहौल के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
🧾 Microsoft की ओर से क्या कहा गया?
theregister.com की रिपोर्ट के अनुसार, Microsoft के एक प्रवक्ता ने बताया है कि कंपनी सिर्फ अपना ऑपरेटिंग मॉडल बदल रही है, न कि पाकिस्तान में सेवाएं बंद कर रही है।
कंपनी की सर्विसेस और कस्टमर एग्रीमेंट्स पहले की तरह चलते रहेंगे।
ग्राहकों को फिलहाल किसी बदलाव का असर नहीं देखने को मिलेगा।
🔚 निष्कर्ष
Microsoft का पाकिस्तान से अपने ऑपरेशन्स समेटना केवल एक कंपनी का फैसला नहीं है, बल्कि यह उस देश की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति का भी प्रतिबिंब है। जहां एक ओर टेक्नोलॉजी का विस्तार हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ अस्थिरता और अव्यवस्था कंपनियों को पीछे हटने पर मजबूर कर रही है।