
इंदौर: राजा रघुवंशी हत्याकांड के बाद एक सवाल हर किसी के ज़ेहन में है — आखिर सोनम रघुवंशी ने ऐसा क्यों किया? एक शिक्षित, आत्मनिर्भर और बिज़नेस संभालने वाली महिला ने ऐसा कौन सा मोड़ लिया कि उसने अपने पति की हत्या तक की योजना बना डाली?
इस केस को समझने के लिए इसे सिर्फ “रिश्तों की उलझन” या “प्यार और नफरत” की कहानी मानना गलत होगा। मनोचिकित्सकों की मानें तो यह मामला मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा हो सकता है, खासकर एंटी सोशल पर्सनालिटी डिसऑर्डर (ASPD) जैसी गंभीर स्थिति से।
🧠 क्या है ASPD और कैसे जुड़ा है सोनम से?
ASPD (Antisocial Personality Disorder) एक ऐसा मानसिक विकार है जिसमें व्यक्ति को अपने किए पर कोई पछतावा नहीं होता, वह दूसरों की भावनाओं की परवाह नहीं करता और समाज के नियमों को चुनौती देना उसे सामान्य लगता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सोनम में ASPD के लक्षण दिख सकते हैं। वह अपनी इच्छा के खिलाफ किसी का दखल बर्दाश्त नहीं करती थी — न परिवार का, न समाज का।
👰 शादी या ज़िद का संघर्ष?
सोनम की शादी राजा रघुवंशी से पारिवारिक दबाव में हुई थी, जबकि वह इस रिश्ते से खुश नहीं थी। मन मुताबिक ज़िंदगी जीने की चाह में उसने एक नया रिश्ता शुरू किया — अपने से छोटे और फर्म में काम करने वाले राज कुशवाहा के साथ। राज ऐसा व्यक्ति था जो बिना सवाल किए उसकी बात मानता था।
विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसे लोग जब नियंत्रण खोते हैं, तो कभी-कभी वो चरम कदम भी उठा सकते हैं — जैसे सोनम ने पति की हत्या का रास्ता चुना।
🤔 राज और राखी: रिश्ते या भ्रम?
केस को और पेचीदा बनाता है सोनम के भाई गोविंद का बयान, जिसमें उसने कहा कि राज को सोनम राखी बांधती थी और उसके फोन में उसका नाम “दीदी” सेव था। सवाल उठता है — क्या यह रिश्ता छलावा था? या सच में कोई परतें छुपी हुई हैं?
😶 पछतावे की कमी: क्या ASPD का असर?
गिरफ्तारी के बाद सोनम न रोई, न घबराई। वह डिटेंशन सेंटर में शांत रही और पूरी नींद ली। विशेषज्ञों के अनुसार यह ASPD के क्लस्टर-B टाइप लक्षण हैं, जहां अपराध के बाद भी व्यक्ति को कोई शर्म या अफ़सोस नहीं होता।
🌀 ‘बहती लहरें’ टैटू और स्वतंत्र सोच
करीब डेढ़ साल पहले सोनम ने अपने ऑफिस के पास एक टैटू बनवाया — “बहती लहरें”। यह टैटू उसके मन की स्थिति को दर्शाता है: वह बंधनों को स्वीकार नहीं करती थी, अपने नियमों पर जीना चाहती थी।
🔚 रिश्तों से परे, एक आंतरिक लड़ाई
शादी तय होने के बाद सोनम ने अपनी मां से कहा था — “तुम अपनी मर्ज़ी कर लो, अब देखना मैं क्या करती हूं।” यही वह विद्रोही सोच थी जिसने अंततः हत्या की ओर रुख किया।
📌 निष्कर्ष
यह केस सिर्फ एक हत्या की कहानी नहीं, बल्कि एक मानसिक और सामाजिक ट्रेजेडी है। जब नियंत्रण की चाह रिश्तों से ऊपर हो जाए, और समाज की सीमाएं इंसान को बांधने लगे, तब ऐसी घटनाएं जन्म लेती हैं। सोनम का मामला हमें यही चेतावनी देता है कि मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना कितना महंगा साबित हो सकता है — किसी की ज़िंदगी छीन लेने तक।