
भारत सरकार देश में बढ़ती बिजली खपत और ऊर्जा की बचत के उद्देश्य से एयर कंडीशनर (AC) के उपयोग को लेकर एक नई योजना लागू करने जा रही है। केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने हाल ही में बताया कि अब एसी के तापमान पर एक निश्चित मानक सीमा (Standard Temperature Range) तय की जाएगी।
🔧 क्या है सरकार की योजना?
सरकार की योजना के अनुसार, देशभर में अब सभी एयर कंडीशनर्स को 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे और 28 डिग्री सेल्सियस से ऊपर सेट नहीं किया जा सकेगा। इसका उद्देश्य ऊर्जा की खपत को कम करना और पर्यावरण को नुकसान से बचाना है।
🌍 क्यों लिया गया यह निर्णय?
बिजली की मांग में भारी वृद्धि: वर्ष 2024-25 में भारत की कुल बिजली मांग 250 गीगावॉट (GW) के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंची।
एसी की तेजी से बढ़ती बिक्री: पिछले साल भारत में लगभग 1.4 करोड़ एसी की बिक्री हुई।
ऊर्जा की बचत और पर्यावरण सुरक्षा: तापमान कम रखने पर एसी अधिक ऊर्जा खपत करते हैं, जिससे बिजली का बिल बढ़ता है और पर्यावरण पर भी असर पड़ता है।
🏙️ शहरी इलाकों में एसी का दबदबा
शहरी क्षेत्रों में एसी की खपत ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में कहीं अधिक है। खासकर दिल्ली, चंडीगढ़, गोवा, पुद्दुचेरी, हरियाणा और पंजाब जैसे राज्य इस दौड़ में सबसे आगे हैं।
मॉल, सिनेमाघर और दफ्तरों में अक्सर एसी का तापमान बेहद कम रखा जाता है, जिससे बिजली की खपत में और वृद्धि होती है।
⚙️ इसे लागू करना कितना आसान?
योजना का क्रियान्वयन कुछ तकनीकी और व्यावहारिक चुनौतियों के साथ जुड़ा है:
पुराने एसी पर नियंत्रण संभव नहीं होगा।
विशेष क्षेत्रों जैसे ऑपरेशन थिएटर या इंडस्ट्रियल सेटअप में कम तापमान की जरूरत होती है।
सरकार यह भी देखेगी कि लोग इस बदलाव को स्वेच्छा से अपनाते हैं या नहीं।
🔌 कैसे कंट्रोल होगा तापमान?
सरकार स्मार्ट मीटर और बिजली लोड के ज़रिए तापमान सीमा लागू करने के विकल्प तलाश रही है।
भविष्य में भारत में ऐसे एसी बनाए जा सकते हैं जिनमें पहले से ही 20–28 डिग्री की सीमा निर्धारित हो।
📉 लोगों को क्या होगा फायदा?
बिजली की बचत: सीमित तापमान से बिजली का उपभोग कम होगा।
बिल में राहत: कम खपत से घरों और ऑफिसों का बिजली बिल घटेगा।
पर्यावरण संरक्षण: CO₂ उत्सर्जन कम होगा, जिससे ग्लोबल वॉर्मिंग पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।
📌 निष्कर्ष
भारत सरकार की यह पहल एक जरूरी और समयोचित कदम है, जो देश में ऊर्जा संकट, पर्यावरणीय बदलाव और बढ़ती एसी खपत को संतुलित करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। हालाँकि, इसे लागू करने के लिए प्रौद्योगिकी, जनभागीदारी और स्पष्ट नीति की आवश्यकता होगी।
❄️ अब एसी चलाइए समझदारी से — न सिर्फ़ अपनी जेब बल्कि पृथ्वी के लिए भी!