
अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरते ही एक एयर इंडिया विमान के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने की घटना ने सभी को हिला कर रख दिया है। इस भयावह हादसे में 270 लोगों की जान चली गई और अब इस पर गहन तकनीकी जांच चल रही है।
शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, टेकऑफ के महज़ तीन सेकंड बाद ही दोनों इंजनों के फ्यूल कंट्रोल स्विच अचानक बंद हो गए, जिससे विमान को ईंधन मिलना बंद हो गया और वह नीचे गिर पड़ा।
स्विच अपने-आप ‘कटऑफ’ कैसे हो गया?
फ्लाइट रिकॉर्डर से प्राप्त जानकारी के अनुसार विमान ने जैसे ही टेकऑफ किया, दोनों इंजनों के ईंधन नियंत्रण स्विच “रन” से अचानक ‘कटऑफ’ मोड में चले गए। पायलटों की बातचीत में एक पायलट दूसरे से पूछता है, “तुमने बंद किया?” जवाब आता है, “मैंने नहीं किया।”
इससे संकेत मिलता है कि यह मानवीय भूल नहीं, बल्कि किसी अप्रत्याशित तकनीकी खामी का नतीजा हो सकता है।
क्या यह सॉफ्टवेयर का मसला है?
ड्रीमलाइनर जैसे आधुनिक विमानों में सॉफ्टवेयर का रोल बहुत बड़ा होता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि टेकऑफ के दौरान पायलट का ध्यान मुख्य रूप से उड़ान इंस्ट्रूमेंट्स पर होता है, न कि फ्यूल स्विच पर। ऐसे में गलती से स्विच बंद करना संभव नहीं लगता।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सॉफ्टवेयर बग या हार्डवेयर की खराबी भी हो सकती है, जिसकी पूरी तरह से जांच होनी चाहिए।
FAA की पुरानी चेतावनी और भारत में लागू न होना
2018 में FAA (अमेरिकी एविएशन अथॉरिटी) ने कुछ विमानों के फ्यूल कंट्रोल स्विच में संभावित खराबी को लेकर एक एडवाइजरी जारी की थी। हालांकि यह अनिवार्य नहीं थी, इसलिए एयर इंडिया ने संबंधित चेकअप नहीं किया।
अब सवाल उठता है कि क्या उस चेतावनी को अनदेखा करना इस हादसे की एक कड़ी है?
थ्रॉटल कंट्रोल मॉड्यूल की भूमिका?
एक और संभावित कारण थ्रॉटल कंट्रोल मॉड्यूल हो सकता है, जिसे इसी विमान में 2019 और 2023 में बदला गया था। भले ही इसकी कोई सीधी लिंकिंग मेंटेनेंस लॉग में दर्ज न हो, लेकिन विशेषज्ञ इस संभावना से इनकार नहीं कर रहे कि यह मॉड्यूल गलत सिग्नल भेज सकता था, जिससे फ्यूल स्विच कटऑफ पर चला गया हो।
FADEC और इंजन की रीस्टार्ट कोशिश
FADEC यानी फुल अथॉरिटी डिजिटल इंजन कंट्रोल सिस्टम इंजन को नियंत्रित करता है और जरूरत पड़ने पर उसे ऑटोमेटिकली चालू भी कर सकता है। इस हादसे में भी पायलट्स ने इंजन को दोबारा स्टार्ट करने की कोशिश की। पहला इंजन स्टार्ट हो गया, लेकिन दूसरा इंजन थ्रस्ट नहीं बना पाया, जिससे दुर्घटना टल नहीं सकी।
जांच में शामिल अंतरराष्ट्रीय टीमें
वर्तमान में भारत की एयरक्राफ्ट एक्सिडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) इस घटना की जांच कर रही है। इसमें अमेरिका, यूके, FAA, NTSB, बोइंग और GE जैसी संस्थाएं भी सहयोग कर रही हैं। जाँच के लिए अतिरिक्त डेटा और मेंटेनेंस रिपोर्ट मंगाई जा रही हैं।