12 जून 2025 को एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 का क्रैश सिर्फ एक तकनीकी या मानवीय चूक का मामला नहीं हो सकता। इस हादसे में 270 लोगों की जान चली गई, और इसकी जांच रिपोर्ट आने से पहले ही पश्चिमी मीडिया द्वारा पायलटों को दोषी ठहराना, एक गहरी साजिश की ओर इशारा करता है।
अब सवाल उठता है — क्या दिवंगत पायलटों को जानबूझकर बलि का बकरा बनाया जा रहा है? क्या यह सारा खेल अरबों डॉलर की बीमा राशि बचाने के लिए खेला जा रहा है? आइए, इस पूरे घटनाक्रम को विस्तार से समझते हैं।
🛫 क्या हुआ था 12 जून को?
एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 अहमदाबाद हवाई अड्डे से टेकऑफ करते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में 270 यात्री और क्रू सदस्य मारे गए। यह विमान बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर था — एक आधुनिक तकनीक से लैस विमान, जो इलेक्ट्रॉनिक फ्यूल सिस्टम से कंट्रोल होता है।
AAIB (Aircraft Accident Investigation Bureau) की प्रारंभिक रिपोर्ट में कुछ अहम बिंदु सामने आए हैं, लेकिन अभी अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है।
⚠️ क्या पायलटों ने जानबूझकर इंजन बंद किया?
AAIB रिपोर्ट के अनुसार, टेकऑफ के कुछ ही पलों बाद, दोनों इंजन के फ्यूल कटऑफ स्विच अचानक ‘रन’ से ‘कटऑफ’ हो गए, जिससे विमान का इंजन बंद हो गया।
रिपोर्ट में “मैनुअल कटऑफ” शब्द का प्रयोग नहीं किया गया, बल्कि “ट्रांजिशन” शब्द का इस्तेमाल हुआ है। यह इंगित करता है कि शायद यह किसी सॉफ्टवेयर गड़बड़ी का परिणाम था, न कि मानवीय भूल।
वॉयस रिकॉर्डर के अनुसार, पायलट आपस में पूछते हैं, “कटऑफ क्यों किया?” और दूसरा पायलट जवाब देता है, “मैंने नहीं किया।” यह संवाद एक आश्चर्य या घबराहट दर्शाता है, न कि साजिश या आत्महत्या का इरादा।
📰 अमेरिकी मीडिया की जल्दीबाज़ी: WSJ ने पहले ही पायलट को दोषी ठहराया
Wall Street Journal जैसे अमेरिकी मीडिया आउटलेट्स ने AAIB की रिपोर्ट से पहले ही दावा करना शुरू कर दिया कि विमान में कोई तकनीकी खराबी नहीं थी और दोष शायद पायलटों का है।
उन्होंने अमेरिकी अधिकारियों का हवाला देते हुए कहा कि “जांच पायलटों के इर्द-गिर्द घूम रही है।”
यह संदेह पैदा करता है कि कहीं बोइंग, FAA और बीमा कंपनियों को बचाने की कोशिश तो नहीं हो रही?
💰 दिवंगत पायलटों को दोषी ठहराने से किसे फायदा होगा?
विमानन विशेषज्ञ कैप्टन किशोर चिंता और कैप्टन राकेश राय के अनुसार:
अगर हादसे के लिए पायलट को जिम्मेदार ठहराया जाता है, तो विमान निर्माता कंपनी बोइंग और बीमा कंपनियां मुआवजे से बच सकती हैं।
FAA ने 2018 में फ्यूल स्विच की तकनीकी खामियों पर चेतावनी दी थी, लेकिन इसे अनिवार्य कार्रवाई नहीं माना गया।
अब अगर तकनीकी दोष साबित होता है, तो FAA और बोइंग को कानूनी रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
इसलिए सारा दोष पायलट पर डालने से बड़ी अमेरिकी कंपनियां बच सकती हैं और अरबों की बीमा राशि देने से भी मुक्ति मिल सकती है।
🤖 क्या सॉफ्टवेयर से इंजन खुद-ब-खुद बंद हो सकता है?
कैप्टन राकेश राय बताते हैं कि आज के विमानों में सब कुछ डिजिटल इंटरफेस से कंट्रोल होता है।
अगर सॉफ्टवेयर में कोई गड़बड़ी होती है, तो वह इंजन को ऑटोमेटिक बंद कर सकता है, चाहे स्विच ‘रन’ पोजीशन में हो।
इसका मतलब यह है कि दोष पायलट का नहीं, बल्कि सिस्टम/सॉफ्टवेयर की विफलता का हो सकता है।
🧑✈️ दिवंगत पायलटों की गरिमा का अपमान?
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह पायलटों को बिना पूरी जांच के दोषी ठहराना, न केवल उनके नाम को कलंकित करता है, बल्कि उनके परिवारों को भी न्याय से वंचित करता है।
“वे अपना पक्ष नहीं रख सकते। उन्हें सम्मानपूर्वक विदाई मिलनी चाहिए, न कि बदनामी,” – कैप्टन किशोर चिंता।
🛩️ क्या AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट पर्याप्त है?
AAIB की रिपोर्ट सिर्फ शुरुआती विश्लेषण है। अभी तक:
फ्यूल स्विच में क्यों ट्रांजिशन हुआ, यह स्पष्ट नहीं है।
सॉफ़्टवेयर/हार्डवेयर फ़ेल्योर की जांच अधूरी है।
एयरलाइन, FAA और बोइंग से विस्तृत जवाब बाकी हैं।
इसलिए, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाज़ी होगी।




















