एक्सिओम-4 मिशन से धरती पर लौटे शुभांशु शुक्ला, कांग्रेस नेता उदित राज बोले- “किसी पिछड़े या दलित को भेजा जाना चाहिए था”

Shubhanshu Shukla Mission News: भारत के लिए एक गर्व का क्षण है, क्योंकि ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला 18 दिनों के अंतरिक्ष मिशन को सफलतापूर्वक पूरा करके धरती पर लौट आए हैंअमेरिका के कैलिफोर्निया तट पर उनके स्पेसक्राफ्ट का सफल स्प्लैश डाउन हुआ, जिससे पूरा देश खुशी से झूम उठा। वहीं दूसरी ओर, इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर राजनीतिक बयानबाजी भी सामने आ रही है

कांग्रेस नेता डॉ. उदित राज ने शुभांशु की वापसी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी पिछड़े या दलित वर्ग के व्यक्ति को मौका मिलना चाहिए था


क्या है एक्सिओम-4 मिशन?

Axiom Mission 4 (Ax-4) एक निजी अंतरिक्ष मिशन है जिसमें चार अंतरिक्ष यात्रियों की टीम ने 18 दिन अंतरिक्ष में बिताए।

  • शुभांशु शुक्ला भारत के वायुसेना के अनुभवी ग्रुप कैप्टन हैं।

  • उनके साथ अन्य तीन अंतरिक्ष यात्री भी इस मिशन का हिस्सा थे।

  • मिशन का उद्देश्य था – अंतरिक्ष में मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं की जांच, तकनीकी प्रयोग और भावी मिशनों की तैयारी।

स्पेसक्राफ्ट को स्पेसएक्स (SpaceX) द्वारा संचालित किया गया और यह ड्रैगन कैप्सूल के जरिए वापस धरती पर लौटा।


स्प्लैश डाउन की रोमांचक प्रक्रिया

  • ड्रैगन कैप्सूल ने पैराशूट की सहायता से कैलिफोर्निया तट पर सुरक्षित लैंडिंग (स्प्लैश डाउन) की।

  • डॉक्टर्स और मेडिकल टीम की निगरानी में सभी यात्रियों को बाहर निकाला गया।

  • रेस्क्यू बोट और हेलिकॉप्टर भी रेस्क्यू ऑपरेशन में तैनात रहे।


घर लौटे शुभांशु, भावुक हुआ परिवार

लखनऊ स्थित शुभांशु शुक्ला का परिवार बेटे की वापसी की खबर सुनकर बेहद भावुक हो गया।

  • मां की आंखों में आंसू और चेहरे पर मुस्कान देखने लायक थी।

  • पिता ने कहा, “यह सिर्फ हमारे लिए नहीं, पूरे देश के लिए गर्व की बात है।”

  • परिवार ने घर में केक काटकर और मिठाई बांटकर जश्न मनाया।


उदित राज का बयान – “पिछड़ा या दलित भेजा जाना चाहिए था”

कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद डॉ. उदित राज ने एएनआई से बातचीत में कहा:

“शुभांशु शुक्ला का ज्ञान और अनुभव मानवता के लिए लाभकारी है। लेकिन जब 1984 में राकेश शर्मा अंतरिक्ष में गए थे, तब SC-ST और OBC तबका इतना शिक्षित नहीं था। आज जब इतने लोग योग्य हैं, तो किसी पिछड़े या दलित को यह मौका मिलना चाहिए था।”

उन्होंने यह भी कहा:

“यह कोई परीक्षा आधारित चयन नहीं था। ऐसा नहीं कि NASA या ISRO में कोई ओपन एग्जाम हुआ हो। अगर चयन प्रक्रिया पारदर्शी होती, तो शायद कोई दलित या ओबीसी भी जा सकता था।”


क्या कहता है विशेषज्ञ वर्ग?

  • विशेषज्ञों का कहना है कि ISRO के गगनयान मिशन के लिए शुभांशु शुक्ला का अनुभव अमूल्य साबित होगा।

  • भारत को मानव अंतरिक्ष मिशन में नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी में यह मिशन एक मील का पत्थर है।


सोशल मीडिया पर दो राय

शुभांशु की उपलब्धि पर सोशल मीडिया पर जहां एक ओर बधाईयों की बाढ़ है, वहीं कुछ लोग उदित राज के बयान पर नाराज़गी भी जाहिर कर रहे हैं।

  • कई यूजर्स ने लिखा – “यह गर्व का पल है, इसे जाति के चश्मे से न देखा जाए।”

  • वहीं, कुछ लोगों ने कहा – “उदित राज ने समाज के वंचित तबके की आवाज उठाई है।”

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