NEET UG 2025 में ऑल इंडिया रैंक 4 पाने वाले मृणाल झा की कहानी – कैसे किया स्कूल और कोचिंग को मैनेज?

देशभर के लाखों छात्रों के लिए मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम NEET UG हर साल नई उम्मीद और प्रतिस्पर्धा लेकर आता है। NEET UG 2025 के रिजल्ट में एक नाम ने सबका ध्यान खींचा — मृणाल किशोर झा, जिन्होंने ऑल इंडिया रैंक 4 (AIR 4) हासिल कर सबको प्रेरणा दी है।


📍 बिहार से दिल्ली तक का सफर

मूल रूप से बेतिया (बिहार) के रहने वाले मृणाल, पिछले कुछ सालों से फरीदाबाद में रह रहे हैं। उन्होंने दिल्ली में अपनी मौसी के घर रहकर NEET की तैयारी की। स्कूल और कोचिंग दोनों को एक साथ मैनेज करना उनके लिए आसान नहीं था — लेकिन मृणाल ने कभी हार नहीं मानी।


🏫 स्कूल और कोचिंग – दोहरी जिम्मेदारी

मृणाल ने इंद्रप्रस्थ पब्लिक स्कूल, रोहिणी से 10वीं और 12वीं की पढ़ाई की। उनके मुताबिक, स्कूल में 75% अटेंडेंस बनाए रखना एक बड़ा चैलेंज था। वह हर दिन कैब से स्कूल जाते, फिर कोचिंग और उसके बाद घंटों की सेल्फ-स्टडी करते।

उनका दिन सुबह 7 बजे शुरू होता और कई बार देर रात तक चलता। मृणाल का मानना है कि कंसिस्टेंसी और टाइम मैनेजमेंट उनकी सफलता की कुंजी थे।


📚 कक्षा 9 से तय कर लिया था सपना

मृणाल ने बताया कि उन्हें बायोलॉजी में दिलचस्पी कक्षा 9 से ही हो गई थी। तभी से उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें डॉक्टर बनना है। 10वीं के बाद उन्होंने साइंस स्ट्रीम (PCB) चुनी और खुद को पूरी तरह NEET की तैयारी में झोंक दिया।


🕒 रोज 12 घंटे पढ़ाई और मॉक टेस्ट से आत्मविश्लेषण

उनका स्टडी शेड्यूल बहुत ही अनुशासित था। कोचिंग के बाद वे रोजाना 5-6 घंटे की सेल्फ स्टडी करते थे। मॉक टेस्ट उनके लिए सिर्फ अभ्यास का नहीं, बल्कि सुधार का जरिया था। जहां कमजोर दिखा, वहां से उन्होंने फिर से शुरुआत की।

उनकी ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में खास रुचि रही, और वे इस विषय को गहराई से समझने में आनंद लेते थे।


🎓 एम्स दिल्ली में दाखिला – एक सपना जो अब हकीकत बना

मृणाल का सबसे बड़ा सपना था कि वह AIIMS Delhi में पढ़ाई करें – जो अब उनकी रैंक के चलते पूरा होने जा रहा है। उन्होंने बैकअप के रूप में मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज और वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज को भी विकल्प के तौर पर रखा था।


प्रेरणा की मिसाल

मृणाल किशोर झा की सफलता दिखाती है कि सपने अगर साफ हों और मेहनत सच्ची हो, तो कोई मंज़िल दूर नहीं। स्कूल, कोचिंग, खुद की तैयारी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाकर उन्होंने यह बड़ी उपलब्धि हासिल की है।

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