
जब भी दुनिया में संकट की घड़ी आती है, भारतीय वायुसेना हमेशा तत्पर रहती है। एक बार फिर ऐसा ही हुआ है। ऑपरेशन सिंधु के तहत वायुसेना ने संघर्षग्रस्त क्षेत्र से सैकड़ों भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाकर मानवता और समर्पण का परिचय दिया है।
🇮🇳 संघर्ष क्षेत्र से सुरक्षित निकाले गए 431 भारतीय
ईरान और इज़राइल के बीच उपजे तनाव के दौरान कई भारतीय नागरिक बीच में फंस गए थे। स्थिति बिगड़ने पर भारत सरकार ने तुरंत ऑपरेशन सिंधु की शुरुआत की। शुरुआत में नागरिक विमानों का उपयोग किया गया, लेकिन जैसे ही हालात और गंभीर हुए, भारतीय वायुसेना को मोर्चे पर बुलाया गया।
C-17 ग्लोबमास्टर विमान को मिशन पर भेजा गया, और भारतीय वायुसेना ने मिस्र और जॉर्डन जैसे सुरक्षित ज़ोन से 431 नागरिकों को एयरलिफ्ट कर भारत पहुंचाया।
🛫 पहले से तैयार था एयरफोर्स का प्लान
सरकार और विदेश मंत्रालय की सतर्कता के चलते वायुसेना का पूरा इवैक्यूएशन प्लान पहले से तैयार था। जैसे ही स्थिति में बदलाव आया, तुरंत हरकत में आने की जरूरत पड़ी। प्लान तैयार होने की वजह से कोई देरी नहीं हुई, और तय समय पर विमान टेक ऑफ कर गया।
वायुसेना ऐसे क्षेत्रों में ऑपरेशन के लिए तैयार रहती है जहां सामान्य नागरिक विमान नहीं जा सकते। वहां की चुनौतियों से निपटने के लिए वायुसेना के पायलट प्रशिक्षित होते हैं।
🏅 पहले भी रचा है ऐसा इतिहास
भारतीय वायुसेना पहले भी कई बार संकट में फंसे नागरिकों को सुरक्षित निकाल चुकी है:
2006 – ऑपरेशन सूकून: इज़राइल-लेबनान संघर्ष के दौरान 2,280 भारतीयों को रेस्क्यू किया गया।
2015 – यमन संकट: सना से भारतीयों को जिबूती होते हुए भारत लाया गया।
2021 – ऑपरेशन देवी शक्ति: अफगानिस्तान से 800 भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया।
2022 – ऑपरेशन गंगा: यूक्रेन युद्ध के दौरान 18,000 भारतीयों की वापसी कराई गई।
2023 – ऑपरेशन कावेरी: सूडान से लगभग 3,900 भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाया गया।
🌍 भारत की ताकत – तैयार रहने की रणनीति
भारत दुनिया के उन गिने-चुने देशों में शामिल है जो हर समय अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए इमरजेंसी प्लान तैयार रखते हैं। चाहे वो युद्ध हो, राजनीतिक संकट या प्राकृतिक आपदा – भारतीय वायुसेना हर बार साबित करती है कि संकट में वह सिर्फ एक फोर्स नहीं, एक भरोसा है।