
हिमालय क्षेत्र में बर्फबारी में तेज़ी से गिरावट, वैज्ञानिकों की नई रिपोर्ट में चिंता
हिंदू कुश हिमालय (Hindu Kush Himalaya) क्षेत्र को लेकर वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक चौंकाने वाली रिपोर्ट पेश की है। ग्लोबल वार्मिंग और बढ़ते तापमान की वजह से इस पर्वतीय क्षेत्र की बर्फ तेजी से पिघल रही है, जिससे नदियों के स्रोत खतरे में हैं। यह वही नदियाँ हैं जो भारत समेत छह देशों – भारत, पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान और चीन – की करोड़ों आबादी के लिए जीवन रेखा मानी जाती हैं।
तापमान बढ़ा तो संकट बढ़ेगा
वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर वैश्विक तापमान 2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया, तो हिमालयी ग्लेशियरों से मिलने वाला पानी बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। इससे क्षेत्र की नदियाँ सूख सकती हैं, और लाखों लोगों की जल आपूर्ति खतरे में पड़ सकती है। हालांकि यदि तापमान वृद्धि को 1 से 1.5 डिग्री के भीतर रोका जा सके, तो अनुमान है कि अभी भी लगभग 40–45% ग्लेशियरों को बचाया जा सकता है।
2100 तक भारी नुकसान की आशंका
एक विज्ञान पत्रिका में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, अगर तापमान की यही रफ्तार जारी रही, तो वर्ष 2100 तक ग्लोबल टेम्परेचर में करीब 2.7 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हो सकती है। इसका मतलब यह होगा कि सिर्फ 25% ग्लेशियर ही बच पाएंगे। यह स्थिति पूरी दुनिया के लिए गंभीर चेतावनी है।
तीसरा ध्रुव और खेती पर प्रभाव
हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र को ‘तीसरा ध्रुव’ कहा जाता है क्योंकि यह आर्कटिक और अंटार्कटिका के बाद सबसे बड़ा बर्फ भंडार है। यहां से निकलने वाली 10 प्रमुख नदियाँ – जिनमें गंगा, ब्रह्मपुत्र, सिंधु जैसी नदियाँ शामिल हैं – इन देशों की खेती, जल आपूर्ति और पारिस्थितिकी को बनाए रखती हैं। अगर ग्लेशियर तेजी से पिघले, तो पानी की किल्लत के साथ ही खेतीबाड़ी पर गहरा संकट आ सकता है।