
जावेद अख्तर, हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध गीतकार और लेखक, अपनी लेखन जोड़ी सलीम-जावेद के ज़रिए असाधारण ऊँचाइयों पर पहुंचे। लेकिन इस सफलता के साथ उनके निजी जीवन में जो बदलाव आए, उस पर उनकी पहली पत्नी हनी ईरानी ने हाल ही में खुलकर बात की।
💬 “उन्हें लगता था मैं कुछ समझ नहीं सकती…”
एक इंटरव्यू में हनी ईरानी ने बताया कि जावेद अख्तर में कामयाबी के बाद गर्व और अहंकार का भाव आ गया था। उन्होंने कहा, “वो कहते थे, ‘तुम नहीं समझोगी,’ या ‘तुम्हें क्या पता?’ यह उनकी सोच में बदलाव का संकेत था।”
उनके अनुसार, जावेद अख्तर सिर्फ अपनी पत्नी ही नहीं, बल्कि दूसरों के सुझावों को भी कमतर समझते थे। जब कोई उन्हें कुछ सुधारने की बात कहता, तो उनका रवैया होता, “हमें मत बताओ क्या करना है, हमें सब पता है।”
💔 रिश्ता टूटा, लेकिन सम्मान बरकरार
हनी ईरानी ने स्वीकार किया कि उनके रिश्ते में मतभेद जरूर थे, लेकिन उन्होंने कभी अपने दर्द को ड्रामा की शक्ल नहीं दी। उनका कहना था, “हमारा अलगाव कभी भी किसी तीसरे व्यक्ति की वजह से नहीं हुआ। शायद वो कुछ ऐसा ढूंढ़ रहे थे जो मुझमें नहीं था।”
हालांकि अलग होने के बाद भी हनी ने यह स्पष्ट किया कि आज भी दोनों के बीच सम्मान और एक सकारात्मक रिश्ता है, खासकर अपने बच्चों के लिए। “मुझे यकीन है कि वह कभी मेरे बच्चों के खिलाफ कुछ नहीं करेंगे,” उन्होंने कहा।
🎥 फिल्म से शुरू हुआ प्यार, जिंदगी में आई दरार
हनी और जावेद की मुलाकात फिल्म सीता और गीता के दौरान हुई थी। वहीं से दोनों के बीच प्यार शुरू हुआ और साल 1972 में उन्होंने शादी कर ली। इस शादी से उन्हें दो बच्चे हुए। लेकिन समय के साथ निजी मतभेद इतने बढ़ गए कि यह रिश्ता आगे नहीं चल सका।
🌱 “अब जावेद बदल चुके हैं”
हनी ईरानी का कहना है कि आज के जावेद अख्तर पहले से काफी बदल चुके हैं। खासकर युवाओं के साथ उनका व्यवहार, उनकी बातचीत का तरीका और विचारों में लचीलापन, यह सब काफी सराहनीय है।
🔚 एक तल्ख़ लेकिन सच्ची झलक
यह बातचीत सिर्फ एक पूर्व पत्नी का ग़ुस्सा नहीं थी, बल्कि एक सच्ची झलक थी उस भावनात्मक सफर की, जिसे हनी ईरानी ने जिया। जावेद अख्तर की यात्रा एक प्रेरणादायक कहानी है, लेकिन इसमें वो मानवीय कमज़ोरियाँ भी शामिल हैं, जिनसे कोई भी अछूता नहीं।