
25 जून 1983 – ये तारीख भारतीय क्रिकेट के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उस दिन, भारतीय क्रिकेट टीम ने ऐसा कारनामा कर दिखाया, जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। एक युवा कप्तान कपिल देव की अगुआई में भारत ने पहली बार क्रिकेट वर्ल्ड कप जीतकर पूरी दुनिया को चौंका दिया।
🏏 कैसे हुआ था करिश्मा?
1983 में भारत की टीम इंग्लैंड रवाना हुई थी, लेकिन ज्यादा लोग इस टीम को खिताब की दौड़ में नहीं मानते थे। फिर भी, भारतीय खिलाड़ियों ने हर मुकाबले में दिल और जूनून से खेलते हुए असंभव को संभव कर दिखाया।
🇮🇳 फाइनल में भारत vs वेस्ट इंडीज
लॉर्ड्स के मैदान पर भारत का मुकाबला था दो बार की चैंपियन वेस्ट इंडीज से। टॉस जीतकर वेस्ट इंडीज ने भारत को पहले बल्लेबाज़ी के लिए बुलाया।
🔹 भारत की पारी:
कुल स्कोर: 184 रन (60 ओवर में)
प्रमुख बल्लेबाज़:
कृष्णम्माचारी श्रीकांत – 38 रन
संदीप पाटिल – 27 रन
मोहिंदर अमरनाथ – 26 रन
कपिल देव – 15 रन
🎯 अब चुनौती थी वेस्ट इंडीज को रोकने की
वेस्ट इंडीज के पास दुनिया के सबसे खतरनाक बल्लेबाज़ थे – खासतौर पर विव रिचर्ड्स, जिन्होंने 33 रन बनाकर खतरा पैदा किया। लेकिन भारतीय गेंदबाज़ों ने हिम्मत नहीं हारी।
🔹 भारतीय गेंदबाज़ों का प्रदर्शन:
मदन लाल – 3 विकेट
मोहिंदर अमरनाथ – 3 विकेट
बलविंदर संधु – 2 विकेट
कपिल देव व रोजर बिन्नी – 1-1 विकेट
वेस्ट इंडीज की पूरी टीम 52 ओवर में 140 रन पर ऑल आउट हो गई और भारत बना वर्ल्ड चैंपियन।
🌟 मोहिंदर अमरनाथ बने हीरो
अमरनाथ ने बल्ले और गेंद दोनों से कमाल दिखाया। उन्होंने अंतिम दो अहम विकेट लेकर मैच को भारत की झोली में डाल दिया और उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच‘ चुना गया।
💬 एक ऐतिहासिक जीत, जिसने बदला भारत का क्रिकेट भविष्य
1983 की जीत ने न सिर्फ ट्रॉफी दिलाई, बल्कि भारतीय क्रिकेट को नई पहचान भी दी। पूरे देश ने इस जीत का जश्न मनाया, और आज भी वो पल हर भारतीय के दिल में जिंदा है।