
महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। ‘महिला कोयर योजना’ (Mahila Coir Yojana) के तहत महिलाओं को न सिर्फ आत्मनिर्भर बनाने की पहल की जा रही है, बल्कि उन्हें स्वरोजगार के लिए जरूरी सुविधाएं भी दी जा रही हैं। इस योजना में महिलाओं को ₹3000 मासिक स्टाइपेंड, कोयर यूनिट के लिए मुफ्त मशीन, और ₹25 लाख तक का लोन मिलने की सुविधा दी जा रही है।
🎯 क्या है Mahila Coir Yojana?
यह योजना Coir Board (कोयर बोर्ड) द्वारा चलाई जा रही है, जो सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) के अंतर्गत आता है। इस स्कीम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को कोयर उद्योग (नारियल के रेशों से जुड़ी कुटीर और लघु इकाइयों) में प्रशिक्षित करना और उन्हें अपना बिज़नेस शुरू करने के लिए सहयोग देना है।
📌 इस योजना के मुख्य लाभ
🔹 ₹3000 मासिक स्टाइपेंड: प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को ₹3000 प्रतिमाह की राशि दी जाती है, ताकि वे सीखते हुए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी रहें।
🔹 फ्री कोयर मशीन: सफल प्रशिक्षण के बाद महिलाओं को कोयर मशीन निशुल्क प्रदान की जाती है, ताकि वे खुद का यूनिट स्थापित कर सकें।
🔹 ₹25 लाख तक का लोन: योजना के अंतर्गत इच्छुक महिलाएं अपने कोयर आधारित उद्योग के लिए 25 लाख रुपये तक का बैंक लोन प्राप्त कर सकती हैं, जिसमें सब्सिडी का लाभ भी शामिल हो सकता है।
🧵 कोयर इंडस्ट्री क्यों?
कोयर यानी नारियल के रेशों से बनी वस्तुएं जैसे- मैट, रस्सी, ब्रश, गद्दे आदि की मांग हमेशा बनी रहती है। भारत, खासकर दक्षिण भारत के राज्यों में यह उद्योग परंपरागत रूप से चला आ रहा है। अब सरकार चाहती है कि इसमें महिलाओं की भागीदारी और बढ़े।
इससे न सिर्फ रोजगार मिलेगा, बल्कि गांवों और छोटे शहरों में महिला उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा।
📑 आवेदन कैसे करें?
महिला कोयर योजना में आवेदन करने के लिए इच्छुक महिलाएं Coir Board की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन कर सकती हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम समय-समय पर विभिन्न राज्यों में आयोजित किए जाते हैं।
➡️ साथ ही, क्षेत्रीय कोयर ट्रेनिंग सेंटर्स में संपर्क कर महिलाएं ऑफलाइन आवेदन भी कर सकती हैं।
🔍 पात्रता शर्तें
✔ भारत की निवासी महिला होना चाहिए
✔ न्यूनतम 8वीं पास या बेसिक साक्षरता
✔ कोयर यूनिट शुरू करने की इच्छुक हो
✔ बैंक खाता और आधार कार्ड जरूरी
🗣 विशेषज्ञों की राय
सरकारी रिपोर्टों और जानकारों के अनुसार, महिला कोयर योजना ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के लिए एक सुनहरा अवसर है। इससे वे घर बैठे ही कम लागत में व्यापार शुरू कर सकती हैं और आत्मनिर्भर बन सकती हैं।