
NEET जैसे प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता पाने के लिए सिर्फ किताबों से रिश्ता बनाना काफी नहीं, बल्कि खुद के भीतर संतुलन बनाए रखना भी बेहद जरूरी है। एक छात्र ने यह साबित कर दिया कि मेहनत और आत्मसंयम के साथ अपने शौकों को भी समय देकर बेहतरीन नतीजे हासिल किए जा सकते हैं।
कोलकाता के छात्र ने हासिल की 16वीं रैंक
कोलकाता निवासी एक प्रतिभाशाली छात्र ने NEET 2025 परीक्षा में 720 में से 670 अंक प्राप्त कर न सिर्फ 16वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल की, बल्कि पश्चिम बंगाल का टॉपर भी बना। इस शानदार उपलब्धि के साथ उन्होंने दिखा दिया कि संतुलन और अनुशासन मिलकर बड़े सपनों को साकार कर सकते हैं।
पढ़ाई के साथ शौक को भी दिया बराबर महत्व
इस छात्र की तैयारी का तरीका काफी अलग था। उन्होंने हर दिन करीब 8 से 10 घंटे की पढ़ाई की, लेकिन इसके साथ-साथ केक बनाना, किताबें पढ़ना और नेटफ्लिक्स देखना जैसे शौकों को भी समय देना नहीं छोड़ा। उनका मानना है कि मानसिक संतुलन बनाए रखना पढ़ाई जितना ही जरूरी है।
प्रेरणा मिली परिवार से, बायोलॉजी बना जुनून
उनकी मेडिकल यात्रा कक्षा 11वीं से शुरू हुई, जब उन्होंने तय किया कि उन्हें लोगों की मदद करने वाला पेशा अपनाना है। बायोलॉजी विषय में रुचि और परिवार में स्वास्थ्य से जुड़े अनुभवों ने डॉक्टर बनने की इच्छा को और मजबूत किया। गणित उनकी पसंद का विषय नहीं था, लेकिन बायोलॉजी ने उन्हें नई दिशा दी।
कोचिंग, सेल्फ स्टडी और मॉक टेस्ट से मिली मदद
उन्होंने अपनी तैयारी के लिए कोचिंग क्लास, खुद की स्टडी और नियमित मॉक टेस्ट का सहारा लिया। वह मानते हैं कि रिवीजन और समय प्रबंधन सफलता की कुंजी हैं। परीक्षा में टॉप 100 की उम्मीद तो थी, लेकिन जब 16वीं रैंक मिली तो पूरा परिवार खुशी से झूम उठा।
अब नजर AIIMS Delhi पर
अब उनका अगला लक्ष्य है AIIMS Delhi में दाखिला लेना। भविष्य को लेकर वह पूरी तरह खुले विचार रखते हैं – चाहे वह रिसर्च हो, स्पेशलाइजेशन या क्लिनिकल प्रैक्टिस। उनका मानना है कि मेडिकल फील्ड में विकल्पों की कोई कमी नहीं, बस सही दिशा में मेहनत करते रहना चाहिए।
निष्कर्ष
इस प्रेरणादायक सफलता की कहानी यह साबित करती है कि सिर्फ किताबी ज्ञान ही नहीं, जीवन में संतुलन और मानसिक ताजगी भी उतनी ही जरूरी है। अगर आप तैयारी कर रहे हैं तो मेहनत के साथ-साथ अपने जुनून और खुशी को भी जिंदा रखें — यही रास्ता सफलता तक ले जाएगा।